
रायगढ़, 16 अक्टूबर 2025। एनटीपीसी और जेएसडब्ल्यू जैसी दिग्गज कंपनियों के पीछे हटने के बाद यह माना जा रहा था कि बनई और भालुमुड़ा कोल ब्लॉक्स का आवंटन अधर में लटक जाएगा, लेकिन ऑक्शन में जिंदल पावर लिमिटेड (जेपीएल) ने दोनों माइंस अपने नाम कर लीं। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों और जटिल खनन क्षेत्र होने के बावजूद जेपीएल ने यह जोखिम उठाया और दोनों कोल ब्लॉक्स हासिल किए।
इस तरह अब रायगढ़ जिले में कुल नौ कोल ब्लॉक्स पर जिंदल समूह का नियंत्रण हो गया है। इनमें शामिल हैं — गारे पेलमा 4/1, गापे 2/2, गापे 4/3, गापे 4/5, गापे 4/6, गारे पेलमा सेक्टर-1, बनई और भालुमुड़ा माइंस। इस अधिग्रहण के बाद तमनार क्षेत्र में जिंदल समूह ने देश का सबसे बड़ा कोल क्लस्टर तैयार कर लिया है, जो आने वाले वर्षों में कमर्शियल माइनिंग के क्षेत्र में एक अहम केंद्र बनेगा। अनुमान है कि इन नौ कोल ब्लॉक्स से 50 से 100 मिलियन टन तक का वार्षिक उत्पादन संभव है।
रायगढ़ के कोल सेक्टर में पहले केवल एसईसीएल और जेएसपीएल का दबदबा था, लेकिन 2015 के बाद हिंडाल्को और अंबुजा सीमेंट जैसी कंपनियों की एंट्री से प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद थी। हालांकि धीरे-धीरे अन्य कंपनियों ने या तो अपने ब्लॉक सरेंडर कर दिए या पीछे हट गईं, वहीं जिंदल समूह लगातार अपने कदम मजबूत करता गया।
तमनार की चिंताएं बढ़ीं
तमनार क्षेत्र में पहले से ही जिले का सबसे बड़ा पावर प्लांट जेपीएल संचालित कर रहा है। अब सबसे अधिक कोयला खदानें भी इसी क्षेत्र में आ जाने से पर्यावरणीय दबाव और स्थानीय समस्याओं के बढ़ने की आशंका है। फिलहाल तमनार में शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं बेहद खराब स्थिति में हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले का सबसे ज्यादा राजस्व तमनार से मिलने के बावजूद विकास का असर जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं देता। कोल ब्लॉक्स की बढ़ती संख्या के साथ खनन, परिवहन और प्रदूषण से जुड़ी चुनौतियाँ भी तेज़ी से बढ़ेंगी। ऐसे में प्रशासन और कंपनी, दोनों के लिए ज़रूरी है कि विकास और जनहित के बीच संतुलन बनाए रखें।



