
वन विभाग ने 3 शिकारी का किया ‘शिकार’, हाथी की मौत के मामले में तमनार वन विभाग की त्वरित कार्रवाई से मिली बड़ी सफलता
रायगढ़ 21 अक्टूबर 2025। तमनार वन परिक्षेत्र में करंट की चपेट में आकर हुई सात वर्षीय जंगली हाथी की मौत के मामले में वन विभाग ने त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। विभाग ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक पूर्व जिला पंचायत सदस्य का पति भी शामिल है। यह कार्रवाई वन परिक्षेत्र अधिकारी विक्रांत कुमार के नेतृत्व में की गई, जिन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर कम समय में पूरे घटनाक्रम का खुलासा कर दिया।

घटना 21 अक्टूबर 2025 को तमनार क्षेत्र के केराखोल गांव के पास हुई थी, जहां खेत की मेड़ पर जंगली सूअर का शिकार करने के उद्देश्य से बिजली का करंट युक्त तार बिछाया गया था। इसी दौरान एक सात वर्षीय नर हाथी उस क्षेत्र से गुजरते हुए इस करंट की चपेट में आ गया, जिससे उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
जांच के दौरान वन अमले ने घटनास्थल से विद्युत तार, खंभे और अन्य उपकरण जब्त किए थे। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हो गया था कि यह मामला शिकार से जुड़ा एक सोचा-समझा कृत्य है। घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर एक विशेष जांच टीम गठित की गई, जिसमें क्षेत्र के अनुभवी वन कर्मियों को शामिल किया गया। टीम ने गांव में जाकर गहन पूछताछ, तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण और स्थानीय मुखबिरों से प्राप्त जानकारी के आधार पर आरोपियों को चिन्हित किया।
वन विभाग की विशेष टीम ने जिन तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनके नाम इस प्रकार हैं —
1️⃣ बसंत राठिया, पिता ठाकुर राम, उम्र 40 वर्ष, निवासी केराखोल (मुख्य आरोपी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य का पति)
2️⃣ वीर सिंह मांझी, पिता मेहत्तर मांझी, उम्र 28 वर्ष, निवासी केराखोल
3️⃣ रामनाथ राठिया, पिता महेत्तर राठिया, उम्र 42 वर्ष, निवासी औराईमुड़ा (सहयोगी आरोपी)

सूत्रों के अनुसार, मुख्य आरोपी बसंत राठिया ही शिकार की योजना बनाने वाला था, जबकि अन्य दोनों आरोपी उसके सहयोगी थे, जिन्होंने बिजली लाइन से तार जोड़ने और जाल बिछाने में उसकी मदद की।
वन परिक्षेत्र अधिकारी विक्रांत कुमार ने बताया कि —

“घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्र में गश्त और निगरानी बढ़ा दी गई थी। टीम ने स्थानीय ग्रामीणों से पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को चिन्हित किया। यह पूरी कार्रवाई पारदर्शी और कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है।”
वन विभाग ने आरोपियों के खिलाफ वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया है।



