
रायगढ़, 17 अक्टूबर 2025। जिले के बड़े उद्योग श्री बांके बिहारी इस्पात प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा एक बड़ा पारिवारिक विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। कंपनी के डायरेक्टर हरबिलास अग्रवाल और उनके बेटों प्रणव अग्रवाल एवं आयुष अग्रवाल पर उनके ही भाई अजय अग्रवाल ने गंभीर आरोप लगाते हुए पूंजीपथरा थाना में एफआईआर दर्ज कराई है। अजय अग्रवाल का आरोप है कि उनके नाम से कूटरचित दस्तावेज और फर्जी हस्ताक्षर कर लगभग ₹4.50 करोड़ मूल्य के 2,09,960 शेयर को गिफ्ट डीड बनवाकर अपने नाम करवाया गया है।
मामले का विवरण
अजय अग्रवाल, निवासी केतका रोड (सूरजपुर) ने पुलिस में दी शिकायत में बताया कि उन्होंने वर्ष 2005 एवं 2023 में श्री बांके बिहारी इस्पात प्रा. लि. के कुल 28 शेयर सर्टिफिकेट के माध्यम से 2,09,960 शेयर खरीदे थे, जिनकी वर्तमान बाजार मूल्य लगभग 4.50 करोड़ रुपये है। आरोप है कि उनके भाई हरबिलास अग्रवाल ने फर्जी एवं बैक डेट का गिफ्ट डीड तैयार कराया, जिस पर अजय अग्रवाल के जाली हस्ताक्षर कराए गए। यह दस्तावेज 16 मई 2024 को नरेश मिश्रा, नोटरी रायगढ़ के सील सहित निष्पादित किया गया बताया गया है।
शिकायत में कहा गया है कि अजय अग्रवाल गिफ्ट डीड के निष्पादन या स्टाम्प खरीद के समय उपस्थित नहीं थे। आरोप के अनुसार, हरबिलास अग्रवाल ने इस फर्जी गिफ्ट डीड और शेयर ट्रांसफर डीड को कंपनी के डायरेक्टरों की मिलीभगत से अपने नाम ट्रांसफर करा लिया।
अजय अग्रवाल को इस फर्जीवाड़े की जानकारी एनसीएलटी कटक (ओडिशा) में चल रहे एक मामले के दौरान उनके अधिवक्ता अभिनव कार्डिकर के माध्यम से हुई, जब वहां यह दस्तावेज विपक्ष की ओर से प्रस्तुत किया गया।
शेयर हिस्सेदारी विवाद
अजय अग्रवाल के अनुसार, कंपनी में उनके परिवार की हिस्सेदारी 47.25 प्रतिशत है, जबकि हरबिलास अग्रवाल की 17.5 प्रतिशत, पारिवारिक कंपनियों की 12.25 प्रतिशत, और अन्य निवेशकों की 23 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि कंपनी के डायरेक्टर प्रणव अग्रवाल एवं आयुष अग्रवाल ने दुरुपयोग करते हुए उनके नाम जारी 28 शेयर सर्टिफिकेट को “नष्ट” घोषित कर दिया और उसकी जगह 20 अप्रैल 2024 को केवल एक शेयर सर्टिफिकेट जारी कर दिया, जिससे फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया।
पुलिस कार्रवाई
पूंजीपथरा पुलिस ने मामले में हरबिलास अग्रवाल, प्रणव अग्रवाल और आयुष अग्रवाल के खिलाफ धारा 420, 34 आईपीसी के तहत अपराध दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी है।
आरोपियों का पक्ष
इस मामले पर जब हरबिलास अग्रवाल से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उनका मोबाइल आउट ऑफ रीच मिला। इसलिए फिलहाल उनका पक्ष प्रकाशित नहीं किया जा सका है। उनका पक्ष प्राप्त होते ही पाठकों को अवगत कराया जाएगा।



