
रायगढ़, दिनांक 5 मई 2026 — जिला जेल में बंद एक विचाराधीन बंदी की सोमवार सुबह संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतक की पहचान तमनार थाना क्षेत्र के कटरा पाली निवासी सुरेश रात्रे (38 वर्ष) के रूप में हुई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुरेश रात्रे को तमनार पुलिस द्वारा 30 अप्रैल को आबकारी एक्ट के तहत गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया था। सोमवार सुबह अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने पर उसे एम्बुलेंस के माध्यम से जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
हालांकि, परिजनों का आरोप है कि सुरेश रात्रे की मृत्यु जेल के भीतर ही हो चुकी थी और बाद में औपचारिकता पूरी करने के लिए उसे अस्पताल ले जाया गया।
जेल प्रबंधन के अनुसार, मृतक शराब का आदी था और जेल में आने के बाद अचानक शराब का सेवन बंद होने के कारण उसकी शारीरिक एवं मानसिक स्थिति बिगड़ गई थी। शनिवार को जेल चिकित्सक द्वारा उसका परीक्षण कर आवश्यक दवाइयां दी गई थीं एवं बेहतर उपचार की सलाह दी गई थी।

मुलाकात के दौरान सामने आई स्थिति
जिस समय सुरेश को अस्पताल ले जाया जा रहा था, उस समय उसकी पत्नी एवं भाई जेल में मुलाकात हेतु पहुंचे हुए थे। उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि जिस एम्बुलेंस को वे देख रहे हैं, उसमें सुरेश का शव मौजूद है।
मृतक के परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
मृतक के भाई नरेश रात्रे ने आरोप लगाया कि तमनार पुलिस द्वारा कम मात्रा में शराब बरामद होने के बावजूद अधिक मात्रा दर्शाकर झूठा मामला दर्ज किया गया। साथ ही उन्होंने जेल प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि सुरेश की तबीयत बिगड़ने के बावजूद उसे समय पर उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई।
परिजनों का यह भी आरोप है कि सुरेश रात्रे ने जेल के भीतर ही दम तोड़ दिया था, लेकिन इसके बावजूद उसके मृत शरीर को उपचार के नाम पर अस्पताल भेजा गया। इसके अतिरिक्त, परिजनों ने जेल के भीतर प्रताड़ना एवं मारपीट की आशंका जताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
भीम आर्मी ने सौंपा ज्ञापन, निष्पक्ष जांच की मांग
जैसे ही इस घटना की जानकारी भीम आर्मी को मिली, संगठन के पदाधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उचित कार्रवाई की मांग की। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक रायगढ़ एवं जिला कलेक्टर रायगढ़ को ज्ञापन सौंपकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की गई है।


अब यह स्पष्ट रूप से देखने वाली बात होगी कि क्या परिजनों को आश्वासन देकर शांत कराया जाता है, या फिर मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कर सच्चाई को सामने लाया जाता है।



